डाॅ0 बीना जोशी
समुद्र पार से आकर अंग्रेजों ने भारत पर मनमाने ढंग से और बड़ी चतुराई से राज कैसे किया। इस प्रश्न का उत्तर तलाशने के क्रम में ब्रिटिश सेवी-वर्ग के अध्ययन से यह आभास होता है कि लगभग सभी अंग्रेज नौकरशाहों ने सर्वप्रथम शासन व प्रशासन सँभालने से पूर्व भारतीयों के प्रत्येक सम्प्रदाय, समुदाय, वर्ग व गुट की मनोस्थिति का व उनके स्वाभाविक गुणों एवं अवगुणों का, उनके विशिष्ट चरित्र तथा उनके पारस्परिक द्वेषों, पूर्वाग्रहों एवं कुण्ठाओं का गहन अध्ययन किया। इस प्रकार के अध्ययन ने उन्हें भारतीयों की सामान्य राजनीति का तथ्यपरक विश्लेषण करने में सक्षम किया जिसके आधार पर उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के परम हितों को ध्यान में रखते हुए ठोस एवं अचूक निर्णय लिए। सर एन्थनी मैकडोनल का आचरण अन्तर्विरोध, कुण्ठाओं व पूर्वाग्रहों से ग्रसित था। उसकी ऐसी मनोस्थिति का नतीजा यह निकला कि भारतीय मुसलमानों में न केवल अलगाववाद की प्रवृत्ति पनपी वरन् हिन्दुओं में भी उग्र राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत हुई। दोनों ही प्रवृत्तियों ने साम्प्रदायिकता को जन्म दिया जिसका चरमोत्कर्ष भारत-विभाजन के रूप में सामने आया।
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