Red Paper
Contact: +91-9711224068
  • Printed Journal
  • Indexed Journal
  • Refereed Journal
  • Peer Reviewed Journal
International Journal of Humanities and Arts
Peer Reviewed Journal

Vol. 7, Issue 2, Part C (2025)

नाटक धरती आबा में प्रतिरोध, इतिहास और क्रान्ति

Author(s):

सर्वेश कुमार मणि, कुलिन कुमार जोशी

Abstract:

समाज और साहित्य दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं । साहित्य के लगभग सभी आयामों में समाज और उसके इतिहास की झलक रहती है । नाटक साहित्य की जीवंत विधाओं में से एक माना जाता है जिसका प्रभाव पठन और दर्शन दोनों स्वरूपों में प्रभावशाली रहता है । नाटक मानव जीवन के पारिवारिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक ताने-बाने के साथ ही साथ ऐतिहासिक प्रसंगों और चरित्रों को भी संवादों तथा दृश्यों में पिरोकर पुनर्जीवित करता है । नाटककार हृषिकेश सुलभ द्वारा रचित नाटक धरती आबा एक ऐतिहासिक महत्व का नाटक है जिसमें भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के जनजातीय नायक बिरसा मुंडा के संघर्षमय जीवन को प्रस्तुत किया गया है । नाटक में भगवान बिरसा मुंडा के क्रांतिकारी जीवन और ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध छेड़े उलगुलान आन्दोलन को दिखाया गया है । इस शोध पत्र का उद्देश्य यह है कि धरती आबा नाटक के माध्यम से यह विश्लेषण किया जाए कि किस प्रकार इस नाट्य साहित्य में इतिहास, प्रतिरोध और क्रांति की अवधारणाओं को समाहित कर सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श प्रस्तुत किया गया है । साथ ही साथ यह अवलोकन किया जाएगा कि बिरसा मुंडा जैसे ऐतिहासिक पात्र के माध्यम से हृषिकेश सुलभ किस प्रकार जनजातीय अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान के प्रश्नों का खड़ा करते हैं । यह अध्ययन बिरसा मुंडा के उलगुलान आन्दोलन और उसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभावों का अध्ययन करेगा ।

Pages: 174-179  |  624 Views  187 Downloads


International Journal of Humanities and Arts
How to cite this article:
सर्वेश कुमार मणि, कुलिन कुमार जोशी. नाटक धरती आबा में प्रतिरोध, इतिहास और क्रान्ति. Int. J. Humanit. Arts 2025;7(2):174-179. DOI: 10.33545/26647699.2025.v7.i2c.209
Journals List Click Here Other Journals Other Journals