डॉ० महेश कुमार पिन्टू
यह शोध पत्र “बिहार के विकास में नीतीश कुमार की भूमिका: 2005 से 2025 तक” राज्य के सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक तथा अवसंरचनात्मक विकास में नीतीश कुमार के योगदान का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वर्ष 2005 में सत्ता संभालने के बाद बिहार एक लंबे समय से व्याप्त प्रशासनिक अव्यवस्था, कानून-व्यवस्था की समस्या तथा विकासात्मक पिछड़ेपन से जूझ रहा था। इस अध्ययन में बीते दो दशकों के दौरान लागू नीतियों, योजनाओं एवं सुधारात्मक कदमों का क्रमबद्ध मूल्यांकन किया गया है।
शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में सुशासन की अवधारणा को केंद्र में रखकर प्रशासनिक सुधार किए गए। कानून-व्यवस्था में सुधार, त्वरित न्याय प्रक्रिया, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण तथा पुलिस-प्रशासन की सक्रियता से राज्य में निवेश एवं सामाजिक विश्वास का वातावरण बना। साथ ही सड़क, पुल, बिजली, सिंचाई तथा ग्रामीण संपर्कता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिली।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे गए। विद्यालयों में नामांकन बढ़ा, छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार हुआ तथा साइकिल और पोशाक योजना जैसी पहल ने विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित किया। स्वास्थ्य सेवाओं में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने जनकल्याण को मजबूती दी।
महिला सशक्तिकरण, पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण, शराबबंदी नीति तथा हरित विकास की दिशा में उठाए गए कदमों का भी इस शोध में विश्लेषण किया गया है। हालांकि कुछ नीतियों पर आलोचनात्मक दृष्टि भी रखी गई है, जैसे बेरोज़गारी, औद्योगिक विकास की सीमाएँ तथा प्रवासन की समस्या।
समग्र रूप से यह शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि 2005 से 2025 के बीच नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, हालांकि सतत एवं समावेशी विकास के लिए अभी भी कई चुनौतियाँ शेष हैं।
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